क्या मुहम्मद अली मिर्ज़ा काफ़िर मुशरिक हो चुका है? | मुहम्मद अली मिर्ज़ा की गिरफ्तारी
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بِسۡمِ اللهِ الرَّحۡمٰنِ الرَّحِيۡمِ
सुरु अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है ।ⓘ
सब तरह की तारीफ़ सिर्फ़ अल्लाह ही के लिए है जो सारी मख़लूकों का रब है। अल्लाह हमारे महान, आख़िरी पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ का ज़िक्र फ़रिश्तों की सबसे ऊँची महफ़िल में बढ़ाएँ, उन्हें बरकत दें और सलामती दें―साथ ही उनके परिवार, उनके सहाबा और जो कोई भी उनके रास्ते पर चल रहा है, क़यामत तक उन सब पर सलामती बनी रहे। आमीन (ऐ अल्लाह! हमारी दुआ क़बूल फ़रमा।)
क्या मुहम्मद अली मिर्ज़ा काफ़िर और मुशरिक है? गिरफ्तारी, सहाबा पर तन्कीद और कुरआन-सुन्नत की रोशनी में पूरी सच्चाई जानें।
Published: 29 अगस्त 2025
Last Update: 29 अगस्त 2025
क्या मुहम्मद अली मिर्ज़ा काफ़िर मुशरिक हो चुका है? | मुहम्मद अली मिर्ज़ा की गिरफ्तारी
अली हुसैन दुनियाँ द्वारा संकलित, लेख (article) 14
लेख 13 लिंक: SunniSalafi.com(https://sunnisalafi.com/quiz-related-to-origin-and-history-of-shirk) (अंग्रेज़ी)"
Hindi/Urdu: Is Muhammad Ali Mirza a Kafir Mushrik? Hindi/Urdu | Mirza Arrested(youtube audio)
आज 30 अगस्त 2025 की
रिकॉर्डिंग है।
मेरा नाम अली है।
मैंने यूट्यूब पर
स्क्रॉल किया तो
बहुत सारी वीडियो
देखीं — न्यूज़
चैनलों पर और
यूट्यूबर्स की
तरफ़ से। कई जगह से
ये खबर आ रही है कि
मुहम्मद अली
मिर्ज़ा
पाकिस्तान में
गिरफ्तार हो चुका
है और उसके
बारे में तरह-तरह
की बातें की जा रही
हैं — उसने
पॉडकास्ट में ये
कहा, वो कहा…
वगैरह।
लेकिन मैं
यहाँ गिरफ्तारी के
मामले में नहीं
जाऊँगा।
बल्कि,
मैं ये बताऊँगा कि
असल में मुहम्मद अली
मिर्ज़ा कौन है?
मैं गिरफ्तारी की चर्चा नहीं करूँगा, बल्कि ये बताऊँगा कि असल में मुहम्मद अली मिर्ज़ा कौन है और उसकी असलियत क्या है।
शुरुआत में
मैं भी उसकी बातें
सुनता था।
क्यों?
क्योंकि वो
मज़ार-परस्ती (कब्र
की पूजा) के खिलाफ़
आम भाषा में बोलता
था। मुझे लगा कि
शायद ये सही बात कर
रहा है।
लेकिन बाद में
समझ आया कि इल्म हासिल करने
का ये तरीका गलत
है।
सिर्फ
इसलिए कि कोई
मज़ार-परस्ती या
अंधविश्वास के
खिलाफ़ बोले, इसका
मतलब ये नहीं कि वो
आलिम या सही राह पर
है।
फिर मैंने
देखा कि अहले-हदीस के कई
आलिम उसकी
गलतियों को उजागर
कर रहे हैं।
वो
सहाबा-ए-किराम
(रज़ियल्लाहु
अन्हुम) की गलतियाँ
निकालता था। जब
मैंने गहराई से
देखा, तो वाकई वो सच
बोल रहे थे। इसी
वजह से मैंने उसकी
बातें सुनना छोड़
दिया।
आजकल मैं
ज़्यादातर सलफ़ी
पब्लिकेशन्स से अंग्रेज़ी
में पढ़ता-सुनता
हूँ।
हिंदी-उर्दू
चैनल बहुत कम सुनता
हूँ।
बस कभी-कभी मकतबा
अस-सलफ़िय्या पाकिस्तान या मकतबा
अस-सुन्नाह(sunnah) इंडिया के चैनल
देख लेता हूँ।
अब मुद्दे पर आते हैं:
मुहम्मद अली मिर्ज़ा की सबसे बड़ी गलती ये है कि:
- वो अपने
माँ-बाप की
गलतियाँ तो कभी
अवाम में बयान
नहीं करता।
- लेकिन
सहाबा-ए-किराम की
गलतियों को आम
करता है।
जैसे कहता है कि:
- अम्मा आयशा
(रज़ियल्लाहु
अन्हा) ने ऐसा
किया,
- अली
(रज़ियल्लाहु
अन्हु) ने वैसा
किया,
- मुआविया
रज़ियल्लाहु
अन्हु ने ये गलती
की,
- हुसैन
रज़ियल्लाहु
अन्हुका क़त्ल
ऐसे हुआ…
यानि सहाबा की कमियों को ढूँढ-ढूँढ कर लोगों के सामने रखता है।
ये काम कुरआन
और सुन्नत (sunnat) दोनों
के खिलाफ़ है।
इस्लाम का तरीका ये
है कि हम सहाबा की
गलतियों को यूँ
अवाम के सामने न
फैलाएँ।
क्योंकि
अल्लाह तआला ने
पहले ही बता दिया
कि वो सब जन्नत
के हकदार हैं।
कुरआन-सुन्नत का तरीका
इस्लाम कहता है कि:
- सहाबा की
गलतियों को अवाम
में आम न किया
जाए।
- क्योंकि
अल्लाह तआला ने
उन्हें जन्नत
का वादा दिया
है।
- उलमा
किताबों में
बताते हैं कि
सहाबा के बीच में
इख़्तिलाफ हुआ
था।
- लेकिन साथ ही ये भी सिखाते हैं कि हमें क्या रवैया अपनाना चाहिए — नफ़रत न रखना, उनके लिए दुआ करना और माफ़ी माँगना।
मिरज़ा की असल
सोच
वो कहता
है कि उलमा और
किताबें सहाबा की
गलतियों को छिपाते
हैं।
लेकिन ये साफ
झूठ है।
किताबों
में सब कुछ लिखा है,
मदारिस में पढ़ाया
भी जाता है।
फर्क़
बस इतना है कि उलमा
सिखाते हैं — इन
मसलों को कैसे
समझना है, कैसे
अपनाना है।
लेकिन मिर्ज़ा क्या करता है?
- गलतियों को
तोड़-मरोड़ कर
यूट्यूब पर
परोसता है।
- बस मशहूर
होने के लिए।
- क्योंकि
यूट्यूब पर तभी
लोग वायरल होते
हैं जब कोई "नया
तड़का" डालें।
असल गड़बड़ी
- उसने
अहले-सुन्नत वल
जमाअत(ahlesunnah-wal-jamah )के सही
मसलक को बिगाड़
दिया।
- सहाबा पर
तन्कीद (आलोचना)
की।
- सब फिरकों
पर उंगली उठाई —
बरेलवी, सूफी,
शिया… सब पर jo kee theek tha
- यहाँ तक कि
सही सलफ़ी उलमा और
मसलक पर भी तन्कीद
की।
- उसके लहज़े से साफ़ झलकता है कि वो घमंडी और अक्खड़ है।
उसके बोलने के
अंदाज़ से ही घमंड
झलकता है।
यही वजह
है कि ये
गुमराह है।
मिसाल – इब्ने मुलजिम(abdurahman ibn Muljam)
- अब्दुर्रहमान
इब्ने मुलजिम
हाफिज़-ए-कुरआन
था।
- लेकिन उसने
एक ख़वारिज़ औरत
से शादी की।
- उस औरत ने
दहेज में अली
(radiallahuanhu.) का सर माँगा।
- उसने जहर
लगी तलवार से अली
(radiallahuanhu.) को शहीद कर
दिया।
लोग कहते हैं कि ये मिर्ज़ा अली ज़ुबैर अली ज़ई का शागिर्द था और ये मिर्ज़ा अली भी ये बात बयान करता है। लेकिन इससे कुछ नहीं होता, क्योंकि अगर किसी आलिम ने कभी किसी की तारीफ़ की हो तो वो हमेशा के लिए नहीं रहती। मौजूदा हालात देखे जाते हैं और उसी हालात पर मरना भी ज़रूरी है।
इसकी दलील मौजूद है: अब्दुर्रहमान इब्न मुलजिम – ये हाफ़िज़े क़ुरआन, क़ारी था। उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के दौर में उन्होंने इसकी तारीफ़ की थी कि ये मिस्र (Egypt) जाकर क़ुरआन पढ़ाए। लेकिन अली रज़ियल्लाहु अन्हु के ख़िलाफ़त में इसने एक ख़ूबसूरत ख़वारिज़ लड़की से शादी कर ली और उस लड़की ने दहेज में अली रज़ियल्लाहु अन्हु का सर माँगा। तो इसने तलवार पर ज़हर लगाकर अली रज़ियल्लाहु अन्हु का सर उड़ा दिया। और फिर लगभग 2 दिन बाद अली रज़ियल्लाहु अन्हु का इंतिक़ाल हो गया।
इससे अहले-इल्म हुक्म निकालते हैं कि जब कोई आलिम किसी की तारीफ़ करता है तो वो हमेशा के लिए नहीं रहती। इंसान का मौजूदा हाल देखा जाता है, न कि सिर्फ़ पुरानी तारीफ़।
मैंने तो अहले-इल्म को गुमराह होते देखा है – कोई थोड़ा गुमराह, कोई ज़्यादा, कोई हिज़बी हो गया, कोई किबार उलमा पर हमला करने लगा, कोई अहले-बिदअत से तावुन करने लगा, कोई इख़्वानी हो गया। तरह-तरह की गुमराहियाँ। अल्हम्दुलिल्लाह, अभी तक अल्लाह ने मुझे हिदायत पर रखा है और मैं हर नमाज़ में यही दुआ करता हूँ कि ऐ अल्लाह, मेरे दिल को इस्लाम पर क़ायम रख।
मैंने बड़े-बड़े उलमा की मजलिस से निकले हुए शागिर्दों को गुमराह होते देखा है।
तो ये इंजीनियर मिर्ज़ा अली की तारीफ़ ज़ुबैर अली ज़ई की अब कोई काम नहीं आएगी, बिल्कुल भी नहीं।
इसी तरह डॉ. ज़ाकिर नाइक को पहले लोग सुनते थे, तारीफ़ करते थे। लेकिन जब गुमराही सामने आई तो अब वो तारीफ़ कोई फ़ायदा नहीं देगी। डॉ. ज़ाकिर नाइक – अहले-बिदअत, इख़्वानी में से है। उसके ऑफ़िशियल चैनल पर साफ़ दिखता है कि वो शुरू में सलफ़ी उलमा का नाम लेता है और आखिर में मौजूदा सूफ़ी “अद-ददू” और ख़ारिज़ी “तरीफ़ी” की तारीफ़ करता है। इससे साफ़ जाहिर होता है कि ये इख़्वानी, अहले-बिदअत में से है।
उसने कई कुफ़्र और शिर्क वाली बातें भी बयान की हैं और अब तक अवाम में तौबा नहीं की। साथ ही डॉ. ज़ाकिर नाइक घमंडी भी है – सिर्फ़ लोग इकट्ठा हों और चंदा आता रहे, इस्लाम की बुनियादी चीज़ों का इल्म नहीं है।
अगर आप सलफ़ की किताबें पढ़ेंगे तो साफ़ दिखेगा – जैसा कि मैंने ज़रूरी इल्म का मुताला किया है: शिर्क, कुफ़्र, तौहीद, ईमान, अ़क़ीदा पर। अबू ख़दीजा की साइट पर दो आर्टिकल हैं, आप अंग्रेज़ी में पढ़ सकते हैं।
Link: Dr Wasiyullāh Abbās: his call for cooperation with Ahlul-Bid’ah and his recommendation and support for Zakir Naik in 2016. Is he right or wrong? (english)
His official link in his official channel: https://youtu.be/qlSshLoFVJk?si=dbgbhpmK0XoJZuJl
👉 पहले की
तारीफ उसके काम न
आई।
वैसे ही, अगर
कोई आलिम पहले किसी
की तारीफ कर दे, तो
इसका मतलब ये नहीं
कि वो हमेशा के लिए
सही ही रहेगा।
यानि, पहले की तारीफ बाद में उसके काम नहीं आई।
तो क्या
मिर्ज़ा काफिर है?
- उसकी बातें
और अकीदा
काफ़िर/मुशरिकों
जैसा है, इसमें शक
नहीं।
- लेकिन
तक़फ़ीर (किसी को
काफ़िर कहना) आम
लोगों का काम
नहीं।
- ये काम
सिर्फ़ पुख़्ता
उलमा और
तालिबे-इल्म
करेंगे।
जब तक बड़े
सलफ़ी उलमा जैसे —
शेख़ अब्दुल
बुख़ारी, शेख़
अरफ़ात, शेख़
फ़ौज़ान, शेख़
मुहसिन अल-अब्बाद
या पुख़्ता
तालिबे-इल्म (अबू
खदीजा, अबू इयाद,
अबू हाकिम) — इस पर
साफ़ फतवा न दें,
हम नाम लेकर
"मिर्ज़ा काफिर
है" नहीं कह सकते।
हाँ, इतना साफ़ है कि वो गुमराह है और उसका रास्ता कुफ्र-शिर्क की तरफ़ है।
निष्कर्ष:
- मिर्ज़ा को
तौबा करनी
चाहिए।
- उसकी बातें
सुनना खतरनाक
है।
- इल्म हासिल
करने का सही तरीका
उलमा से जुड़कर,
किताबों को सही
तरतीब से पढ़कर है
— न कि यूट्यूब की
दो मिनट की
क्लिप्स से।
👉 यही पूरी हक़ीक़त और निचोड़ है।
1. कुरआन में सहाबा की तारीफ़
सूरह अल-हशर (59:10) में है:
"रब्बना, वला
तजअल फी क़ुलूबिना
ग़िल्लन
लिल-लज़ीना आमनू
रब्बना, इनका
रऊफ़ुर-रहीम"
(कुरआन,
सूरह अल-हशर, आयत 59:10)
हिंदी
अनुवाद:
"हे
हमारे पालनहार!
हमारे दिलों में उन
लोगों के लिए कोई
नफ़रत न रख, जो ईमान
लाए हैं। हमारे
पालनहार! तू
अत्यन्त दयालु और
दया करने वाला
है।"
सहाबा के लिए संदेश
- सहाबा
अल्लाह के प्यारे
हैं:
- यह आयत
हमें याद दिलाती
है कि अल्लाह ने
ईमान वालों के लिए
दिल में नफ़रत न
रखने का आदेश
दिया। सहाबा को
लेकर भी ऐसा ही
होना चाहिए।
- भाईचारा
और प्रेम:
- सहाबा ने
पैगंबर ﷺ के साथ
हिजरत और जिहाद
किया। हमें उनके
प्रति नफ़रत,
ईर्ष्या या
आलोचना नहीं करनी
चाहिए।
- माफ़ करना
और सम्मान करना:
- इस आयत के अनुसार, मुसलमानों को सहाबा की गलती या कमजोरी देखकर भी नज़रअंदाज़ करना है, न कि गल्तियाँ, बुराइयाँ या सहाबा की कमियाँ निकालकर आम लोगों में बता दिया जाए।
- सिखावन:
- इस आयत से सीख है कि सहाबा की इज़्ज़त करना और उनके प्रति द्वेष न रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी है।
सहाबों के लिए
अल्लाह की दुआ और
माफी
- कुरआन 9:100 – "अल्लाह ने उन
लोगों से रज़़ी हो
गए जो पहले हिजरत
करके और क़यामत तक
संघर्ष करने वाले
थे। अल्लाह ने
उनसे संतुष्टि ली
और उन्हें जन्नत
में दिया।"
- मतलब: पहले
हिजरत करने वाले
और संघर्ष करने
वाले सहाबा के लिए
अल्लाह ने जन्नत
का वादा किया।
सहाबों से
नफरत न करने और
उन्हें माफ करने का
आदेश
- कुरआन 9:79-80 – अल्लाह कहते
हैं कि जो लोग
सहाबों की आलोचना
करते हैं, उन्हें
सज्जा मिलेगी,
लेकिन जो लोग माफ
कर दें और नफरत न
रखें, अल्लाह उनकी
भी माफी कर
देगा।
2. हदीस में सहाबों की فضीلت
सभी सहाबा के
लिए जन्नत का
वादा
- हदीस (सहीह
अल-बुख़ारी, हदीस
3656) – पैगंबर
मुहम्मद ﷺ ने कहा:
"मेरे सहाबा की कोई बुराई मत करो।"
मतलब: सहाबा से नफरत न करें और उनकी इज़्ज़त करें।
aḥīḥ al-Bukhārī 3673, Ṣaḥīḥ
Muslim 2540
अली
रज़ियल्लाहु
अन्हु का जन्नत में
होना
- हदीस (सहीह
मुस्लिम) –
पैगंबर ﷺ ने कहा:
"अली रज़ियल्लाहु अन्हु जन्नत में हैं।"
एक सहाबी के
कार्य का महत्व
- पैगंबर ﷺ
ने कहा: "अगर तुम
उनके कामों पर अमल
करोगे, तो भी कोई
उनके बराबर नहीं
हो सकता, जैसे ऊहुद
की पहाड़ी के
बराबर।"
सहाबा की
इज़्ज़त का आदेश
- पैगंबर ﷺ
ने स्पष्ट किया कि
उनके सहाबा की
इज़्ज़त करो और
उनके खिलाफ कुछ भी
न कहो।
सारल हिंदी में मुख्य बातें:
- सहाबा
अल्लाह के प्यारे
हैं और जन्नत में
हैं।
- उनके बारे
में नफरत, गुस्सा
या बुरा बोलना मना
है।
- जो सहाबा
हिजरत और जिहाद
में शामिल हुए,
अल्लाह ने उन्हें
पुरस्कृत किया।
- पैगंबर ﷺ
ने अली
रज़ियल्लाहु
अन्हु सहित सभी
मुख्य सहाबा की
तारीफ़ की।
- अगर आप
उनके अच्छे काम
अपनाएंगे भी, फिर
भी उनके बराबर
नहीं पहुंच
सकते।
इंटरनेट और AI में भटकाव पर नोट्स:
- गलत
जानकारी का
फैलाव: इंटरनेट और AI
कभी-कभी गलत या
अधूरी इस्लामी
जानकारी देते
हैं।
- सही और
ग़लत की पहचान: हर जानकारी पर
भरोसा न करें,
सिर्फ भरोसेमंद
इस्लामी स्रोतों
से ही सीखें।
- भटकाव के
कारण:
- बिना सही
तालीम वाले लोगों
का कंटेंट
- अफवाह या
सुनी-सुनाई
बातें
- AI मॉडल
कभी-कभी गलती कर
सकता है क्योंकि
यह इंसानों की
लिखी चीज़ें
सीखता है।
- सावधानी:
- हमेशा
कुरान और सुन्नत
की ओर लौटें।
- ज्ञानी और
योग्य उलेमा से ही
हुक्म और समझ
लें।
- निष्कर्ष: AI और इंटरनेट मदद कर सकते हैं, लेकिन सही इस्लामी ज्ञान के लिए भरोसेमंद और प्रमाणित स्रोत जरूरी हैं।
संक्षेप (सरल हिंदी में)
- मुहम्मद
अली मिर्ज़ा पाकिस्तान में
गिरफ्तार हुआ है।
लेकिन उसकी गिरफ्तारी का असली मुद्दा नहीं, बल्कि उसकी सोच और दावत का निचोड़ देखना ज़रूरी है। - शुरू में
लोग उसे सुनते थे
क्योंकि वो मज़ार-परस्ती
(कब्र-पूजा) के
खिलाफ बोलता था।
मगर बाद में पता चला कि वो सही इल्म नहीं देता और गलत तरीका अपनाता है। - उसकी सबसे बड़ी
गलती ये है
कि:
- अपने
माँ-बाप की
गलतियाँ कभी
सामने नहीं
बताता।
- लेकिन सहाबा-ए-किराम
की गलतियाँ
ढूँढ-ढूँढकर आम
करता है।
- वो कहता है
कि उलमा किताबों
में बातें छुपाते
हैं, जबकि ये झूठ
है।
- कुरआन और
सुन्नत का
तरीका:
- कुरआन में
हुक्म है कि सहाबा
के बारे में दिल
में नफ़रत न रखो और
उनके लिए दुआ
करो।
- मिर्ज़ा ने
यूट्यूब पर फेमस होने के
लिए नया तड़का
लगाया।
उसने सभी फिरकों (बरेलवी, सूफी, शिया, यहाँ तक कि सलफ़ी) पर उँगली उठाई और घमंड से बातें कीं। - उलमा की
राय:
- उसकी बातें
कुफ्र और
शिर्क तक
पहुँच चुकी हैं।
- लेकिन किसी
को काफ़िर
घोषित करना
(तक़फ़ीर) आम
लोगों का काम नहीं
है, ये सिर्फ़
पुख़्ता उलमा
करेंगे।
- अभी तक
किसी बड़े सलफ़ी
आलिम ने उसे नाम
लेकर काफ़िर नहीं
कहा है।
- हाँ, इतना
तय है कि वो गुमराह और
खतरनाक है।
- कुरआन और
हदीस की सीख:
- सहाबा सब
अल्लाह के प्यारे
हैं और जन्नत के
हकदार हैं।
- उनकी
गलतियों को
फैलाना और उनकी
आलोचना करना मना
है।
- पैग़ंबर ﷺ
ने फ़रमाया: “मेरे सहाबा की
बुराई मत करो।”
- अली समेत
कई सहाबा के बारे
में साफ़ हदीस है
कि वे जन्नती
हैं।
- निचोड़:
- मुहम्मद
अली मिर्ज़ा
गुमराह है और उसकी
बातें खतरनाक
हैं।
- आम लोगों
को चाहिए कि वो
उसकी बातें न
सुनें।
- असली इल्म
धीरे-धीरे, उलमा और
सही किताबों से
सीखना चाहिए।
- यूट्यूब या
इंटरनेट की दो
मिनट की वीडियो से
सही दीन नहीं सीखा
जा सकता।
Original transcript from audio: Is Muhammad Ali Mirza a Kafir Mushrik? Hindi/Urdu | Mirza Arrested(youtube audio)
अस्सलामु अलैकुम वा रहमतुल्लाहि वा बरकातहु
आज अगस्त 30 है 2025 (2025, august 30) में रिकॉर्डिंग कर रहा हूँ।
मेरा नाम अली तो मैंने यूट्यूब(youtbe) स्क्रॉल किया तो कई सारी वीडियो मैंने देख रहा हूँ न्यूस चैनल पर, यू ट्यूबर्स की। कई तबके की तरफ से की मोहम्मद अली मिर्जा को अरेस्ट किया गया है। पाकिस्तान में और फला फला उसके साथ ये ये हो रहा है। उसने ये ये पोडकास्ट (podcast)में कहा है तो अब हम इस मसले में नहीं जाएंगे, लेकिन हम लोग क्या करेंगे? की उसका पूरा निचोड़ मोहम्मद अलीम मिर्ज़ा कौन है इसका पूरा निचोड़ हम लोग देखेंगे क्योंकि पहले मैं भी इसको सुनता था तो फिर बाद में मैंने इसको छोड़ दिया।
पहले मैं इसको क्यों सुनता था क्योंकि ये मजार(ख़ास खबर नेक लोगों का) परस्ती(grave worshipping) के खिलाफ़ आम जुबान में जनरल में बोलता था, तो मैं समझता था की ये होगा कोई अच्छा। लेकिन बाद में पता चला कि इल्म(knowledge) लेने का सही तरीका ऐसा नहीं है कि कोई भी अगर मजार परस्ती के बारे में बोल रहा है या उधर उधर की बातें बोल रहा है, जो आपको मन को अच्छा लग रहा है तो उसको आप सुनना कीजिए, उसको आलीम समझ ले तो ये तरीका नहीं है।
बाद में कई एले हैदीस(ahlehadees) के तरफ से यूट्यूब पे, ये सारी वीडियो आने लगी कि मोहम्मद अली मिर्जा साहबा(shahaba) की गलतियाँ कैसे निकालता है तो बाद में जब मैंने इसको और थोड़ा गहराई में देखा तो सही बात थी तो इसीलिए मैंने इसको छोड़ दिया और मैं अभी फिलहाल किसी, इंडियन यूट्यूब पाकिस्तानी यूट्यूब जो हिंदी उर्दू में बनाते हैं कॅन्टेंट(content) मैं तकरीबन नहीं के बराबर ही सुनता हूँ, खासकर मेरे सेल्फी पब्लिकेशन की तरफ से मैं इंग्लिश में ही ज्यादा लेता हूँ।
एक है जो ईदारा मकताब असलफिया पाकिस्तान में वहाँ से मैं सुनता हूँ। तारिक अली ब्रोही(ustadsh tariq Ali Brohi) और मक्तब सुनना(Maktabah as-Sunnah) है जो इंडिया में, लेकिन वहाँ पर कुछ ज्यादा वीडियो नहीं आती तो यही दो हिंदी चैनल हिंदी उर्दू चैनल मैं सुनता हूँ। खासकर सेल्फी पब्लिकेशन से इंग्लिश में ही लेता हूँ तो हम लोग अरेस्ट के बात पर नहीं जाएंगे। क्योंकि अब ये इतना हाइप है, ट्रेंडिंग में है पाकिस्तान में मोहम्मद अली मिर्जा जो की अपने आपको इंजीनियर कहता है और कई लोगों ने तो इसको यहाँ तक बढ़ा रखा है कि ये आलिम है, स्कॉलर है, उलेमा में से है तो इसका अरेस्ट हो चुका है। कई सारी वीडियो बन रही हैं तो इसका हम पूरा निचोड़ देखेंगे।
तो आप गौर करेंगे की ये कभी भी अपने माँ बाप की गलतियाँ हो या बुराइयां हो, आम लोगों में चार लोगों के बीच में ये बयान नहीं करेगा। कभी भी आप नहीं पाएंगे की चौराहे पे या चार पांच लोगों के बीच में या किसी पोडकास्ट(podcast) में ये अपने यूट्यूब चैनल की मेरे बाप माँ में बाप में ये झगड़ा हुआ। ऐसा ऐसा गलती हुआ उनका ये मिस्टेक है, वो मिस्टेक है। हालांकि इसके माँ बाप को सर्टिफिकेट नहीं मिला है कि ये हमेशा के लिए जन्नत(jannat) में है फिर भी ये नहीं गलती निकालता है।
लेकिन यही चीज़? वो सहाबा की गलतियों को निकालता है। सहाबा में ये इकलाफ हुआ वो इकलाफ हुआ उनका ये गलती था उनका ये गलती था अम्मा आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने ऐसे किया अली रज़ियल्लाहु अन्हु उन्होंने ऐसे किया।
मुआविया(Muwawiyah) रज़ियल्लाहु अन्हु ने ऐसे किया वैसे किया की, गलतियाँ खोज खोज कर ये निकालता है और कई तरह के अंदाज में अपने अलफ़ाज़ से बयान करता है जो कि बिल्कुल ही सुन्नी सेल्फी(sunni-salaf) अहले सुन्नत वल जमात के खिलाफ़ है, कुरान सुन्नत(sunnat) के बिल्कुल ही खिलाफ़ है और ये झूठ बोलता है।
जैसे मैंने कहा ये अपने माँ बाप की गलती है, नहीं निकालता लेकिन साहबा(shahaba) में क्या हुआ? उनके बीच में क्या हुआ? अली ने क्या कहा? क्या जंग हुई ? हुसैन का कत्ल तो फलाना ढिकाना। ये सब अपने अंदाज में इस तरीके से बयान करता है, उनकी गलती है, गुनाहों को अवाम करता है लेकिन अपने ही माँ बाप को गलतियाँ और बुराइयों को नहीं, अवाम के सामने पेश करता है और ये कहता है कि ये लोग अपने आवाम से छुपाते हैं ये इन अपने आवाम से छुपाते हैं अपने किताबों में छुपाते हैं हमसे हालांकि बिल्कुल गलत है।
यूनिवर्सिटी में मदारिस में अहले इल्म की किताबों में आप पाएंगे कि वो लोग इस मसले को बयान करते हैं कि सहाबा में कैसे इख़्तिलाफ़ हुआ कैसे जंग हुई। किस तरीके से गलतफहमियां थीं लेकिन साथ ही साथ कुरान का उसूल भी देते हैं। कुरान का उसूल भी देते हैं कि ये सब एक खिलाफ़ हुई ऐसे ऐसे हुई और ये दौर गुजर चुकी है और उनका सवाब हिसाबो किताब अल्लाह के जिम्मे हम लोग अब आगे बढ़ चूके हैं। जो पहले लोगों में हो चुका अब वो हम लोग आगे बढ़ चूके हैं। अल्ला ने कायदा बता दिया है कि कैसे इस मसले को एड्रेस किया जाए। शहाबा में खिलाफ़ जो कुछ हुआ, अल्ला ने बयान किया है कि हमारे दिल में कोई नफरत और कजी ना पैदा कर उस मसले को लेकर। और जो हमसे पहले गुजर चूके उनको माफ़ कर दे और हमको भी माफ़ कर दे तो ये के लोग सिखाते है की हाँ ऐसे ऐसे हुआ लेकिन हमारा तरीका क्या होना चाहिए? एप्रोच क्या होना चाहिए? मनहज जीसको हम कहते है तरीका समझने का और अमल करने का।
इस्लाम में तो हम लोग शहाबा की गलतियों को ऐसे ही बेवजह आम नहीं करना चाहिए, ना ही उनके गुनाहों को, क्योंकि अल्लाह ने पहले ही उन लोगों को एड्रेस कर दिया कि वो लोग। जन्नत के हकदार हैं। अल्लाह ने प्रॉमिस(वादा) किया और ऐसे ही एक रिवायत मौजूद है जो कि बदर में एक शामिल थे। लेकिन उन उन्होंने गलती की लेकिन फिर भी नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नज़रअन्दाज़ की एक्स्क्यूस(excuse) किया तो शहाबा का?
जो हमारा कुरान का सही समझ है कि हम उनकी गलतियों को बयान ना करें अवाम के सामने, ना ही उनके गुनाहों के बारे में क्योंकि अल्लाह ने सबको जन्नत(jannat) का वादा किया है।
और खासतौर पे अली रदीअल्लाह के बारे में या फला फला ऐसा ऐसा हुआ अली रदीअल्लाह के बारे में खास करके नवी ने कहा कि वो जन्नती है, नाम लेकर तो आप कैसे ये जंग हुआ? ये वो जंग हुआ अम्मा आयशा रज़ियल्लाहु अन्हु ने ये कहा अली को
अली रज़ियल्लाहु अन्हु और अम्मा आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा में जंग हुई, अली रज़ियल्लाहु अन्हु यहाँ ठीक थे या यहाँ गलत थे, और अम्मा आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा यहाँ ठीक थीं या यहाँ गलत थीं।
कोई जरूरत नहीं आपको अवाम के सामने बयान करना तो ये हमारा एप्रोच है, ऐसा नहीं की नहीं, पढ़ाते? हाँ, जानकारी के लिए आप जानकारी ले सकते है। किताबों में मौजूद है। अहले इल्म की किताबों में मौजूद है, मदारिश में पढ़ाया जाता है, लेकिन इसको कैसे एप्रोच किया जाए ये भी सिखाते हैं और जैसे मैंने कहा ये अपने माँ बाप की गलतियाँ नहीं बताएगा तो ये आप एकदम ही ख्याल रखें कि इसकी ये पहली जड़ थी।
इसने क्या किया? सब गुमराह फिरका को अपनी किताबों में ये छुपाते अपनी किताबों में सब कुछ गलतियाँ निकालने लगा और चूरन देने लगा फेमस(famous) होने के लिए। क्योंकि यूट्यूब पे आप ऐसे ही फेमस नहीं होंगे जब तक के लिए, आप कुछ नया नहीं लाओगे।
जिसने ये तड़का लाया तो इसीलिए लोगों ने इसको उभाला और जो लोग प्रोमोट कर रहे हैं, सिर्फ यूट्यूब के लिए प्रोमोट कर रहे हैं कि हमारा व्यूस(views) बढ़ेगा, चैनल बढ़ेगा, ग्रो हो गए, सब्सक्राइबर बढ़ेगी तो कुछ इन्कम भी आएगा यूट्यूब के तरफ से तो ये सब कुछ गलती से निकलना है।
साथ ही साथ ये पहले अहले सुन्नत वल जमात के जो मेन समझ है कुरान सुन्नत की वो भी इसमें गड़बड़ी की। पहली गड़बड़ी इसकी यही थी। शहाबा के समझ लोग ये समझते थे कि बरेलवी सूफी और कई सूफियों का गलतियाँ निकाल रहा है। मजार परिस्थिकी तो हम इसको सुने और इसको आगे बढ़ाएं नहीं, ऐसा नहीं होता है। हालांकि ये सब तरफ हो रहे है। ये एक तरफ किसी तरीके पर नहीं है, इसीलिए ये सारे फिरके को 73 जो फिरका है। ये सब में गलतियाँ निकालता है। हालांकि जो नाज़िया फिरका है फिरका तो नाज़िया(fiqat-un0najiyah) उसमें भी ये गलती कर बैठा और ये घमंडी भी है। आपको इसके अल्फाज़ से बोलने के अंदाज से जीस तरीके से ये बोलता है अल्फाज़ इस्तेमाल करता है। साफ पता चलता है कि इसको चीड़ है, घमंड है लोगों से। तो ये बिल्कुल वाज है कि यह सहाबा पर तंकित करता है और ये अगर इस वजह से जेल में गया है तो ठीक है।
जैसे मैंने कहा कि यू ट्यूब पे फेमस होने के लिए आपको कुछ नया तड़का लाना पड़ेगा। जब तक आप कोई नया तड़का नई चीज़ एकदम नहीं लाएंगे, आप वही घिसा पीटा हुआ चीज़ जो पढ़ाते हैं,शिर्क़(shirk) क्या, क्या ईमान9Iman) क्या है? तौहीद(tawheed) क्या है? तो कोई भी आपको सुनने के लिए तैयार नहीं होगा क्योंकि ये सब बार-बार पढ़ाया जाता है, कोई नई चीज़ नहीं है।, ना ही आपकी व्यूस सब्सक्राइबर आप इतना फेमस भी होंगे लेकिन जैसे ही आप तड़का लाएंगे जैसे इसने(mirza ali) किया तो ये सब फेको की ये अब आपके आलीम ये छुपा रहे हैं, ऐसा ऐसा फलाना फलाना ढिकाना है तो ये सबको लपेटने लगा और साथ ही साथ इसमें जो सही समझ है। जो बुनियादी इल्म है वो भी इसमें ये गलती कर बैठा और लोग कहते हैं कि शेख अलीजई का ये स्टूडेंट था। भले ही ये शेख अलीजई का स्टूडेंट है, किसी भी आलिम का बड़े आलिम का भी हो लेकिन वो गुमराह हो गया तो गुमराह ही है क्योंकि ये हदीसों से भी मालूम चलता है और शहाबा के तरीके से जैसे की अब्दुर्रहमान, इबने मुलजिम ये कौन था? ये ख़वारिज़ ही था। पहले ये ख़वारिज़ नहीं था।
उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के दौर में इन्होंने अब्दुल रहमान इनने मुलजिम(Abdur rahman ibn Muljam) की तारीफ की थी कि आप मिस्र (Misr or egypt) जाके कुरान पढ़ाइए कुरान सिखाइए तो ये अब्दुल रहमान इनने मुलजिम, ये किया था हाफिज ए कुरान था, कुरान का हाफिज था, कारी था।
फिर जब इसने ख़वारिज़ लड़की से शादी की, वो लड़की बहुत खूबसूरत थी तो इसने शादी की लेकिन लोग मना करते थे लेकिन फिर भी इसने शादी की तो उसने लड़की ने क्या मांगा की मुझे दहेज में ये चाहिए, अली का सर चाहिए।
अब इसने क्या किया कि तलवार में जहर पोंत कर अली रज़ियल्लाहु अन्हु क गर्दन ही उड़ा तो अब ये तारीफ उमर उमर रज़ियल्लाहु अन्हु की इसके काम आएगी। बिल्कुल नहीं।
इस मसलै से ये रूलिंग(fatwa) हुक्म निकालते हैं कि अगर कोई आलिम गुमराह हो जाए। बाद में पहले आलिम ने तारीफ की है और बाद में गुमराह हो जाए। तो इसका मतलब यह नहीं कि उसकी जो तारीफ की थी वह हमेशा के लिए तो आलिम जब तारीफ किसी करता है तो हमेशा के लिए नहीं होता है, तो उसका हाल देखा जाता है। मौजूदा जैसे अब्दुल रहमान मुल्जिम का तो उसने अलीरद्दीन को कतल किया तो यह बिल्कुल भी।तारीफ उसको फायदा नहीं देगी।
तो भले ही ये(ali mirza) Jubayer अलीजाई के ये सागिरद था या किसी और? हमने तो कई गुमराहही में देखी है। बड़े बड़े आलिंग के में से निकलते है लेकिन कुछ ऐसे होते है जो गुमराह हो जाते है। कुछ थोड़ा गुम रहा होते है, कुछ उससे भी ज्यादा हिज़्बिया की तरफ चले जाते हैं। कुछ उससे भी ज्यादा चले जाते हैं तो ये जरूरी नहीं की कोई आलिम किसी को तारीफ करे तो वो तारीफ हमेशा के लिए ही रहता है। इसीलिए उस पर मरना। जरूरी है। इसीलिए शहबा का डेफिनिशन क्या? जिसने नवी को देखा इमान लाया। नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर इस्लामकुबूल किया। उस पर उसकी मौत हुई ईसी को शहबा कहते हैं तो जो लोग इसको प्रोमोट कर रहे हैं। वो हम सब को पता है। यूट्यूब के लिए आपका ही वीडियो जैसे डॉक्टर जैकी नाइक पहले मैं इसको भी सुनता था। बहुत सुना लगभग दो ढ़ाई साल।
लेकिन बाद में पता चला की ये इखवानी अहलेबिद्दत से हैं, खासकर के उनकी यूट्यूब वीडियो पर ऑफिसियल वीडियो है । वो अपने अहले इल्म का नाम बताते उसमें आप एक आलिम का नाम पाएंगे। वो कहते हैं, अद्दद्दु9Ad-daddwu)? ये मोर्तानिया का सूफी अली आलिम हैं , और साथ ही साथ अत-तरीफ़ी (the Khāriji, Abdul-Aziz At-Tareefi)तारीफ की है। ये बिलकुल ही खारिज ही है।
इसके बारे में आप अब्बू खादीजा.कॉम पे इसकी आर्टिकल पढ़ सकते(abukhadeeja.com) है।
Link: Dr Wasiyullāh Abbās: his call for cooperation with Ahlul-Bid’ah and his recommendation and support for Zakir Naik in 2016. Is he right or wrong? (english)
तो वैसे ही मैंने भी इसको छोड़ दिया। पहले लोगों ने तारीफ की थी, लेकिन बाद में जैसे जैसे ये आगे बढ़ते गए इसकी रंग बदलने लगी। सिर्फ एक ही ऐसा मक़तबा सालफ़ियाह है जीसको मैंने पाया इसकी रिसर्च करने के बाद कि वो जैसे थे 1990 से अभी तक 2025 तक सेम टु सेम दांव है शिर्क से रोकना, तोहिद पर बोलाना, सुनत पर बोलना, गैरही में शिर्क और तौहीद सिखाना, नाम लेकर बड़े गुमराहों की रद्दा करना, सुन्नत फैलाना,
हसन अस-सोमली जो कि इमाम मुकबिल हादी, जो कि यमन के इमाम थे जहाँ से उन्होंने पढ़ के आए, हसन अस-सोमली दम्माज शहर, यमन(yemen) से इमाम मुक़बिल रहिमहुल्लाह से इल्म सीखकर आए थे और एक इंटरव्यू में वो कहते हैं, मैं अब्बू अयाद अमजद रफीक(abuiyaad-amjad-rafiq link: abuiyaad-amjad-rafiq site official) को मिला और कई। इन्स्टिट्यूट थे, लेकिन एक मकबबा सालिफिया था जो इनका दावा अभी भी सेम टु सेम ही वो बदले नहीं और उन्होंने कहा कि और मैंने इन्स्टिट्यूट मदारिस देखे, वो लोग लिबरल हो चूके, लोगों के साथ जैसा उठना बैठना वैसे ही हो जाना, लेकिन ये सलफ़ी पब्लिकेशन(salafi publication) एक ऐसा है जो कि अभी तक भी सेम ही है। उसी तरीके पर अकाय मनहज(Aqidah Manhaj) में अभी भी कोई बदलाव नहीं है।
तो जैसे मैंने कहा ये(ali mirza) हर जगह है इसको। लोगों ने उठा दिया कि स्कॉलर है? हालांकि ये बिलकुल नहीं है। ये बिलकुल ही चाहिल है तो क्या हुक्म है? तो पहले तो क्या ये गुम रहा है?
हाँ मोहम्मद अली मिर्ज़ा घूम रहा है, लेकिन क्या इसको काफिर मुस्लिम कहा जाता है? तो इसके बारे में हाँ इसका ईमान और इसकी समझ तो मुशरिक और काफ़िर तक पहुँच चुका है, इसमें कोई डाउट नहीं है। लेकिन इसको क्या नाम से कहा जाएगा की ये मोहम्मद अली मिर्जा काफ़िर है तो इसके लिए आप को तकफिर का मतलब है मुसलमान को काफिर कहना जिसने कलमा पढ़ा है ला इला हा इल्लल्लाह मोहम्मद रसूल्लाह तो ये आम लोगों का काम नहीं है। तो जब तक मैं किसी रिलाएबल स्कॉलर या पुख्ता तालिबहीन से अगर फतवा नहीं ले लेता, तब तक मैं इसको नाम से मुसरीक काफ़िर नहीं कहूं गा जैसे की रिलाएबल मतलब शेख अब्दुल बुखारी, शेख़ अरफ़ात, शेख़ फौज़ान, शेख़ मुशसिन अल अब्बाद, ये मक़्तबा सालफ़ियाह के पुख़्ता तालिबे इल्म जैसे अबूखदीजा, अबू इयाद, अबू हाकिम तो ये लोग अगर इस पर तफ्तीर करते है तो मैं भी करूँगा नाम से, लेकिन अभी तक किसी ने पूछा नहीं है, नहीं जवाब आया है, तो मैं नाम लेकर नहीं कहता हूँ कि मिर्ज़ा अली काफ़िर है, बिल्कुल नहीं। हाँ, वह गुमराह है, मुशरिक/काफ़िर तक गुमराही है, लेकिन तकफ़ीर का हुक़्म आलिम लगाएगा, आम बंदा नहीं।
इसको तौबा करना चाहिए ।
यहाँ तक कि मैंने ऐसा भी देखा है कुछ जो अपने आप को हटा चूके हैं बिल्कुल बरेलवी-सूफ़ी की तरफ से, फिर भी इसको सुनने लगे और इसको रेकमेंड9recommend) करने लगे क्यों? क्योंकि ये बरेलवी-सूफ़ी और कईयों का रद बता रहा है।
यहाँ तक कि का भी रद बता रहा है तो कई लोग जो अपने आप को कहते थे वो इसको भी सुनने लगे। मैं ऐसे लोगों को जानता हूँ नाम से जो कि इसको रेकमेंड कर दे, इसके वीडियो को रेकमेंड कर टे है।व्हाट्सएप(whatsapp) में भेजते हैं मैं खुद एक बंदे को देखा कि उसने तो व्हाट्सएप पे इसको नमाज़ के तरीके के बारे में वीडियो भेजा। मैंने कहा, ये अपने आप को ahlehadees की जमातों में जाना और तारीफ करना इतनी सालों से फिर उसके बाद यूं यु टर्न हालांकि कई इसकी गलती मौजूद है फिर भी वह नज़रअन्दाज़ करते हैं।
अरेस्ट हुआ क्यों हुआ? ये हमको उससे कुछ लेना देना नहीं है। इसका जो मेन निचोड़ है, जो इसका दावात है। शुरू से आखिर तक मैंने आपको इसको बयान किया की अपने माँ बाप के लेकिन की गलतियाँ और ये कहता है की हम अपनी किताबों में छुपाते हैं। किताब पढ़ने का भी तरीका होता है। ऐसा नहीं है की हर किताब में कोई गलतियाँ नहीं है लेकिन इसको फिल्टर करना कौन सी किताबें पढ़ना चाहिए, कौन सी नहीं पढ़ना चाहिए? अहले इल्म में गलती है तो उसको कैसे टैकल किया जाता है? ये सब जरूरी है लोगों को सीखना लेकिन हम लोग क्या चाहते हैं कि 1 मिनट का रील, 2 मिनट का रील अपने जो मन में अच्छा लग रहा है वो सुने और बाकी कुछ नहीं। दो 3 मिनट में आप क्या आप सिर्फ इस पार्क से चिंगारी भर ला सकते हैं? एक 2 मिनट के रियल में यूट्यूब वीडियो में। लेकिन असल इल्म क्या है जो एकदम आहिस्ते आहिस्ते धीरे बच्चे की जैसे सीखते हैं। जैसे shaykh salih al-fawzan ने कहा बच्चे तरह बच्चे जब। छह महीने का तो सिर्फ माँ का दूरी पीते उसको पानी न हजम होता है ना खाना हजम होता है। क्यों? क्योंकि वो अभी लायक नहीं हुआ तो धीरे धीरे ऐसे ही बच्चे की तरह इनको सीखना चाहिए। ज्यादा कलह हो खर।
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